दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं जुर्म सिर्फ़ इतना है... जुर्म सिर्फ़ इतना है, उनको प्यार करते हैं जुर्म सिर्फ़ इतना है, उनको प्यार करते हैं जुर्म सिर्फ़ इतना है, उनको प्यार करते हैं ऐतबार बढ़ता है और भी मोहब्बत का ऐतबार बढ़ता है और भी मोहब्बत का जब वो अजनबी बनकर... जब वो अजनबी बनकर पास से गुज़रते हैं जब वो अजनबी बनकर पास से गुज़रते हैं जब वो अजनबी बनकर... जब वो अजनबी बनकर पास से गुज़रते हैं जब वो अजनबी बनकर पास से गुज़रते हैं उनकी अंजुमन भी है, दार भी, रसन भी है उनकी अंजुमन भी है, दार भी, रसन भी है देखना है दीवाने... देखना है दीवाने अब कहाँ ठहरते हैं देखना है दीवाने अब कहाँ ठहरते हैं देखना है दीवाने (अब कहाँ ठहरते हैं, ठहरते हैं, ठहरते हैं) देखना है दीवाने अब कहाँ ठहरते हैं दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं
Dil Pe Zakham Khate Hain is a Punjabi album song by Nusrat Fateh Ali Khan from the album Qawwali Night. Released in 1993. Find song credits, album details, duration and available audio quality on Mr-Punjab.
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