ज़िन्दगी के सफ़र में बहुत दूर तक ज़िन्दगी के सफ़र में बहुत दूर तक जब कोई दोस्त आया ना हमको नज़र हमने घबरा के तन्हाइयों से सबा हमने घबरा के तन्हाइयों से सबा एक दुश्मन को ख़ुद हमसफ़र कर लिया सादगी तो हमारी ज़रा देखिए सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतबार आपके वादे पर कर लिया सादगी तो हमारी ज़रा देखिए सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतबार आपके वादे पर कर लिया बात तो सिर्फ़ एक रात की थी मगर बात तो सिर्फ़ एक रात की थी मगर इन्तज़ार आपका उम्र-भर कर लिया सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतबार आपके वादे पर कर लिया तेरे अबाब की रूदाद हो गए हैं हम तेरे अबाब की रूदाद हो गए हैं हम बड़े ख़लूस से बर्बाद हो गए हैं हम ज़रा देखिए सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतबार आपके वादे पर कर लिया इश्क़ में उलझनें पहले ही कम ना थीं इश्क़ में उलझनें पहले ही कम ना थीं और पैदा नया दर्द-ए-सर कर लिया और पैदा नया दर्द-ए-सर कर लिया इश्क़ को दर्द-ए-सर कहने वालों, सुनो इश्क़ को दर्द-ए-सर कहने वालों, सुनो कुछ भी हो, हमने ये दर्द-ए-सर ले लिया कुछ भी हो, हमने ये दर्द-ए-सर ले लिया अब वो निगाहों से बचके कहाँ जाएँगे अब वो निगाहों से बचके कहाँ जाएँगे अब तो उनके मुहल्ले में घर ले लिया अब तो उनके मुहल्ले में घर ले लिया इश्क़ में उलझनें पहले ही कम ना थीं इश्क़ में उलझनें पहले ही कम ना थीं और पैदा नया दर्द-ए-सर कर लिया और पैदा नया दर्द-ए-सर कर लिया लोग डरते हैं क़ातिल की परछाइ से लोग डरते हैं क़ातिल की परछाइ से हमने क़ातिल के दिल में भी घर कर लिया सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतबार आपके वादे पर कर लिया तेरी सल्तनत में हैं तेरे लश्कर से घेरे हुए तेरी सल्तनत में हैं तेरे लश्कर से घेरे हुए तू मारे, छोड़े, क़ैद में डाले, हम तो बस तेरे हुए तू मारे, छोड़े, क़ैद में डाले, हम तो बस तेरे हुए बेक़रारी मिलेगी, लुटेगा सुकूँ बेक़रारी मिलेगी, लुटेगा सुकूँ चैन छिन जाएगा, नींद उड़ जाएगी चैन छिन जाएगा, नींद उड़ जाएगी अपना अंजाम सब हमको मालूम था अपना अंजाम सब हमको मालूम था आप से दिल का सौदा मगर कर लिया सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतबार आपके वादे पर कर लिया ज़िक्र एक बेवफ़ा और सितमगर का था ज़िक्र एक बेवफ़ा और सितमगर का था आपका ऐसी बातों से क्या वास्ता? आपका ऐसी बातों से क्या वास्ता? आप तो बेवफ़ा और सितमगर नहीं आप तो बेवफ़ा और सितमगर नहीं आपने किसलिए मुँह उधर कर लिया? सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतबार आपके वादे पर कर लिया
Mulaqat is a Punjabi album song by Rani Randeep from the album Naseeb. Released in 2007. Find song credits, album details, duration and available audio quality on Mr-Punjab.
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